Aarti

आरती

Aarti of Satguru Shri Bawa Lal Dayal Ji Maharaj

आरती श्री बावा लाल दयाल जी की

|| आरती श्री बावा लाल दयाल जी की ||

ओउम जय बावा लाल गुरु, स्वामी जय श्री लाल गुरु, सतगुरू जय श्री ।।
शरण पड़े जो आकर, उसका उद्धार करो । ओउम जय श्री लाल गुरु ।।
सतयुग हंस राम श्री त्रेता द्वापर कृष्ण भये,सतगुरू द्वापर कृष्ण भये ।।
कलियुग पतित उधारण, लाल दयाल भये, ओउम जय श्री।। 1 ।।
सतगुरु लाल हैं जिन के पुर्ण भाग किए । सतगुरू।।
ग्रहस्थी क्या हो वैरागी, वह सब मुक्त हुए । ओउम जय श्री ।। 2 ।।
हरि गुरु में नही भेदा, इन में जो भेद करे। सतगुरू ।।
वह नर पापी समझो जग में नही सुधरे। ओउम जय श्री।। 3 ।।
हम सेवक तुम सतगुरु और न शरण कोई। सतगुरू और न शरण कोई।
संशय सभी मिटाओ, मन में है जोई । ओउम जय श्री ।। 4 ।।
सब सेवक तुम शरणी, पूर्ण आशा करो । सतगुरू पूर्ण आशा करो ।
अन्तर्यामी सतगुरू सब के पाप हरो । ओउम जय श्री ।। 5 ।।
मोह अज्ञान मिटा कर पावन बुद्धि करो, सतगुरू पावन बुद्धि करो ।
निर्मल भक्ति देकर ह्रदय मेरा शुद्ध करो । ओउम जय श्री।। 6 ।।
तुम्हारी आरती क्या कोई गावे, किस में है शक्ति । सतगुरू किस में है शक्ति ।
विषय विकार मिटा कर, दियो चरणन भक्ति।ओउम जय श्री।। 7 ।।
हरि गुरु लाल जी की आरती निश दिन जो गावे । सतगुरू निश दिन जो गावे ।
कहत 'हरि हर' सेवक हरि भक्ति पावे। ओउम जय श्री।। 8 ।।
ओउम जय बावा लाल गुरु ,स्वामी जी श्री लाल गुरु, सतगुरू जय श्री ।।
शरण पड़े जो आकर, उसका उद्धार करो । ओउम जय श्री लाल गुरु ।।